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Yoga Mantra
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
1 |
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥ ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥ |
अर्थात- गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है. गुरु हो साक्षात परब्रह्म है. ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं.
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2 |
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय ॥ ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥ |
(हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो । अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो || मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥ |
3 |
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु ।
सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु । मा विद्विषावहै ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।। |
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सह नाववतु: परमात्मा हम दोनों (गुरु और शिष्य) की साथ-साथ रक्षा करें।
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सह नौ भुनक्तु: हम दोनों का साथ-साथ पालन-पोषण करें।
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सह वीर्यं करवावहै: हम दोनों साथ मिलकर विद्या प्राप्ति का सामर्थ्य (शक्ति) प्राप्त करें।
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तेजस्वि नावधीतमस्तु: हमारी पढ़ी हुई विद्या तेजस्वी हो।
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मा विद्विषावहै: हम कभी एक-दूसरे से द्वेष न करें।
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4 |
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ |
ॐ वह पूर्ण है और यह भी पूर्ण है; क्योंकि पूर्ण से पूर्ण की उत्पत्ति होती है। तथा पूर्ण का पूर्णत्व लेकर पूर्ण ही बचता है।
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5 |
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ |
सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े । |
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